सोचो कि आपके पास एक बहुत ही जबरदस्त जॉब है पैसे भी अच्छे आ रहे हैं और जिंदगी भी बढ़िया चल रही है लेकिन अचानक एक दिन जब आप ऑफिस पहुंचते हो तो आपको पता लगता है कि आपको नौकरी से निकाल दिया गया है अब यहां पर आप अकेले नहीं हो बल्कि आपके साथ आपकी फैमिली के और भी मेंबर्स हैं जो आपके ऊपर फाइनेंशियलीईएक्सप्रेस ऐसी ही सिचुएशन में फंसे हुए हैं अगर मैं.

यहां पर नंबर्स की बात करूं तो मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के मुताबिक आज राजस्थान में 23.1 उड़ीसा में 21.9 और आंध्र प्रदेश में 24 ऐसी पॉपुलेशन है जो कि आज अनइंप्लॉयड है इन सभी लोगों को आज एंप्लॉयमेंट की जरूरत है और अगर जल्दी कुछ नहीं किया गया तो आने वाले वक्त में इन सबकी हालत बहुत ही.

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ज्यादा खराब हो सकती है इसी तरह से अगर हम साल 2020 में वापस मुड़कर देखें तो उस वक्त पर हमारे देश का जो हाल था वो इससे भी ज्यादा बरा था क्योंकि कोविड के आते ही लाखों लोगों को रातों-रात अपनी जॉब से निकाल दिया जाता है और क्योंकि सब लोग अपने घर में बन थे तो ऐसे में किसी के लिए जॉब ढूंढ पाना नेक्स्ट टू इंपॉसिबल हो चुका था मगर उसी वक्त पर हमारे देश में एक.

ऐसी कंपनी का जन्म होता है जिसने ना सिर्फ इन लाखों लोगों को जॉब दिलवाई बल्कि ये कंपनी इंडिया की फास्टेस्ट ग्रोइंग यूनिकॉर्न भी बनती है ये कहानी है अपना की एक ऐसी कंपनी जिसने लाखों लोगों का जॉब का सपना पूरा किया और वो भी घर बैठे-बैठे जॉब रिक्रूटमेंट की एक ऐसी मार्केट जिसमें n.com इड और मनस्टर जैसी कंपनी सालों से राज कर रही थी आखिर इतने कम वक्त में इन.

सबको हराकर अपना नंबर वन हायरिंग कंपनी कैसे बन जाती है वो ऐसी कौन सी पावरफुल बिजनेस स्ट्रेटजीजर जो इस स्टार्टअप ने इस्तेमाल करी अपने कंपीटीटर्स को इस रेस में हराने के लिए यह सब कुछ आखिर क्यों और कैसे हो पाया इन सारी चीजों को आज जरा डिटेल में समझते हैं तो ये कहानी शुरू होती है साल 2019 में जब निर्मित पारिक अपने फ्रेंड्स और.

रिलेटिव्स के बीच में एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम को आइडेंटिफिकेशन कई सारी कंपनीज हैं जिनको आज भी लेबर शॉर्टेज की प्रॉब्लम आ रही है मतलब कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ तो मिसिंग था फिर जब वो इस चीज को थोड़ा और डिटेल में स्टडी करते हैं तो उन्हें ये पता लगता है कि जो जॉब सीकर्स और एंप्लॉयज हैं उन दोनों के बीच में जो एक्चुअल गैप है वो है लैक ऑफ.

स्केलेबल नेटवर्किंग इंफ्रास्ट्रक्चर इसको अगर मैं बहुत ही आसान भाषा में बोलूं तो एक प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफार्म की कमी थी जब कोविड आया तो बहुत सारी कंपनीज जो कि हायरिंग स्पेस के अंदर काम कर रही थी वो इस सेक्टर में अपनी इन्वेस्टमेंट करना कम कर देते हैं यह सोचते हुए कि आगे इसमें ग्रोथ के चांसेस काफी कम है सर यहीं पर निर्मित एक कांट्रेरियन बेट लेते हैं.

कांट्रेरियन बेट का मतलब होता है कि जब आप मार्केट के ट्रेंड्स के अगेंस्ट जाकर एक कैलकुलेटेड रिस्क लेते हुए कोई एक डिसीजन लेते हो जो कि आज की डेट में भी अगर आप देखोगे तो बहुत सारी सक्सेसफुल कंपनीज ये करती हैं अब निर्मित ऐसा इसलिए कर पाए क्योंकि उन्होंने सही तरीके से अपने बिजनेस को टाइम किया था और जब ऐसा होता है तो निर्मित को ये समझ में आता है कि अब जब.

कोविड खत्म होगा तो कोविड के बाद जितनी भी हायरिंग होंगी वो ऑफलाइन नहीं बल्कि ऑनलाइन तरीके से करी जाएंगी मगर इस चीज को और श्योर बनाने के लिए निर्मित खुद ग्राउंड पर उतरते हैं और इलेक्ट्रिशियन से लेकर फ्लोर मैनेजर्स तक हर एक तरीके के जॉब का एक्सपीरियंस लेकर ये समझते हैं कि आखिर मार्केट में प्रॉब्लम्स आ कहां-कहां पर रही है और ये जो उनके एक्सपीरियंस थे.

इन्हीं एक्सपीरियंस से शुरुआत होती है उनके नए स्टार्टअप अपना की लेकिन ये कंपनी आखिर इतनी सक्सेसफुल क्यों और कैसे बन पाई इस चीज को समझने के लिए हमें इन तीन चीजों को एकदम डिटेल में समझना होगा जिसमें पहला है इंडस्ट्री प्रॉब्लम्स सेकंड है कंपनी का बिजनेस मॉडल और थर्ड है कंपनी की इस्तेमाल करी गई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी तो सबसे पहले समझते हैं इंडस्ट्री प्रॉब्लम्स.

को इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट ये बताती है कि इंडिया का अन एंप्लॉयमेंट रेट बढ़कर अक्टूबर 2023 के अंदर अपने पिछले 2 साल के हाईएस्ट लेवल को क्रॉस कर चुका है जो रेट सितंबर में 7.09 पे था वो अक्टूबर में बढ़कर 10.05 पर आ गया एंड दिस इज जस्ट द टिप ऑफ द आइसबर्ग क्योंकि हमारे देश में जो अनइंप्लॉयमेंट की प्रॉब्लम है ये आज से नहीं बल्कि कई सालों से एजिस्ट करती है अब.

इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए मार्केट में nukri.com इड मनस्टर ऐसी कई कंपनीज आई और इन सभी ने जो जो लोग जॉब ढूंढ रहे थे उन सबको जॉब देने वाली कंपनी से कनेक्ट करवाया मगर यहां पे एक बहुत बड़ा गैप था वो ये था कि जो भी जॉब ढूंढने के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर आता था उनको जॉब तो मिल जाती थी मगर वो अपने जैसी बाकी प्रोफेशनल्स जो कि उसी की तरह जॉब ढूंढ.

रहे हैं उनके साथ वो नेटवर्किंग नहीं कर पाता था और इससे भी बड़ा जो कंसर्न था वो यह कि जिसको जॉब देनी है उसको सही एंप्लॉई नहीं मिल पाता था और जिसको जॉब चाहिए वो वहां तक पहुंच ही नहीं पाता था जहां पर उसको जॉब मिल सकती है और इन्हीं सारी चीजों को सॉल्व करने के लिए निर्मित एक मोबाइल ऐप लॉन्च करते हैं जो कि 70 से भी ज्यादा स्पेशलाइज्ड प्रोफेशनल्स जैसे कि.

कार्पेंटर्स सेल्स एग्जीक्यूटिव्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स प्रोडक्ट मैनेजर्स और यहां तक तक के डिलीवरी बॉयज भी इन सभी लोगों को उनसे कनेक्ट करवाता है जिनको इनकी सर्विसेस की जरूरत है लेकिन यहां पर भी एक बहुत बड़ी दिक्कत थी वो ये थी कि जो जॉब मार्केट है ना वहां पर आप सक्सेसफुल तभी हो पाओगे जब आप जॉब सीकर्स और एंप्लॉयज इन दोनों की नीड्स को समझो अब.

यहां पर शुरुआती दिनों में अपना ने एक चीज नोटिस करी कि जो एंप्लॉयर है ना वो चाहे एक इलेक्ट्रिशियन हायर करें या फिर एक जूनियर एग्जीक्यूटिव वो दोनों ही केसेस के अंदर एक बहुत ही स्किल लेबर चाहता है पर वहीं पर दूसरी तरफ जो लोग इनके प्लेटफॉर्म पर जॉब सर्च कर रहे थे अक्सर उनकी स्किल्स एंप्लॉयर की स्किल रिक्वायरमेंट से मैच ही नहीं कर पाती थी तो प्लेटफार्म बनाने के.

बाद भी लोगों को जॉब ढूंढने में दिक्कत आ रही थी जिस चीज को सॉल्व करने के लिए कंपनी ने एक स्ट्रेटजी का इस्तेमाल किया जिसको कहते हैं यूजर सेंट्रिक अप्रोच ये जो यूजर सेंट्रिक अप्रोच की स्ट्रेटेजी थी इससे कंपनी को जॉब सीकर और एंप्लॉयर इन दोनों के डाटा इनसाइट्स मिल जाते थे जिस चीज का इस्तेमाल करके कंपनी ने एक बहुत ही स्ट्रांग फीडबैक लूप तैयार किया अब यहां.

पर इस कंपनी ने ये तीन स्टेप्स उठाए जिसमें पहला स्टेप तो ये था कि कंपनी ने अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके जो भी लोग जॉब सर्च कर रहे हैं उनको वही जॉब दिखाई जो कि उनकी स्किल से मैच करती हो और सेम इसी तरीके से जो रिक्रूटर्स हैं उनको भी वही कैंडिडेट्स दिखाए जिनका स्किल सेट उनकी रिक्वायर्ड स्किल सेट से मैच करता हो जिसके बाद कंपनी ने ये दूसरा कदम उठाया अब.

इनको ये तो समझ में आ चुका था कि जो हायरिंग प्रोसेस है वो बहुत ही ज्यादा इनएफिशिएंट है जिसकी वजह से जो जॉब ढूंढने वाले बंदे की एप्लीकेशन है वो कभी इंटरव्यू तक पहुंचती ही नहीं है जिस चीज को देखते हुए इन्होंने अपने प्रोडक्ट के अंदर इनोवेशन किया और जो कंपनी एच आर्स थे उनको पहले हफ्तों लग जाते थे उस प्रोसेस को.

इन्होंने मिनट्स में कन्वर्ट किया अब ये सब कुछ करने के बाद कंपनी ये नोटिस करती है कि हमारे प्लेटफार्म पर कई सारे ऐसे लोग हैं जो कि ऑलरेडी बहुत स्किल्ड हैं तो उनको तो इजली जॉब मिल जाएगी पर अब जो मदद करनी है वो उन लोगों की करनी है जो कि उतने स्किल्ड नहीं है जिस चीज को ठीक करने के लिए कंपनी ये तीसरा स्टेप उठाती है इन्होंने किया ये कि जो जॉब ढूंढने वाले.

कैंडिडेट्स हैं ताकि वो साथ ही साथ खुद को अप स्किल भी करते रहे एक प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्रोडक्ट बनाया जिससे कि लोग एक दूसरे से स्किल सीख सके इंटरव्यू की प्रैक्टिस कर सके और ऑन ग्राउंड जो काम चलता है उससे रिलेटेड फीडबैक ले सके क्योंकि एक एंप्लॉयर भी किसी को तभी हायर करता है जब उसके पास उस जॉब को करने की स्किल सेट हो अब ये जो तीन स्टेप्स अपनाने.

उठाए इसका फायदा ये हुआ कि साल 2022 के अंदर हर महीने अपना 2 करोड़ से भी ज्यादा इंटरव्यूज को फैसिलिटेट करने लग गया अब जो भी लोग जॉब ढूंढ रहे थे उनके लिए अपना एक बहुत ही यूजफुल प्लेटफॉर्म बन चुका था इनफैक्ट जिन-जिन लोगों को n.com और मनस्टर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी जॉब नहीं मिल रही थी उनको भी अपना ने जॉब दिलवाने में मदद करी क्योंकि इन्होंने कारपेंटर से लेकर.

प्रोडक्ट मैनेजर तक हर एक बंदे को सर्व करने के लिए प्रोडक्ट बनाया मगर ये सब कुछ करने के बावजूद भी जो भी कंपनीज जॉब रिक्रूटिंग प्लेटफॉर्म्स के ऊपर आती थी उनको ये दो दिक्कतों का सामना करना पड़ता था जिसमें पहली दिक्कत थी बल्क कम्युनिकेशन जब भी कंपनीज को ज्यादा एंप्लॉयज हायर करने होते हैं तो जो उनके इनिशियल राउंड पर कैंडिडेट्स निकलते हैं.

उनका नंबर भी बहुत ज्यादा होता है अब इन सारे लोगों को नेक्स्ट राउंड या फिर नेक्स्ट स्टेप के लिए कांटेक्ट कर पाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल हो जाता है और फिर जो दूसरी दिक्कत थी वो थी कॉस्ट ऑफ हायरिंग जब भी कोई कंपनी किसी एंप्लॉई को मार्केट में हायर करने के लिए निकलती है तो उसका ये एक गम होता है कि वो अपनी कॉस्ट ऑफ हायरिंग को कम से कम रखें.

इनफैक्ट जब कंपनीज बल्क में एंप्लॉयज हायर करती है तब उनके लिए ये कॉस्ट ऑफ हायरिंग को कम से कम रखना सबसे ज्यादा बड़ी प्रायोरिटी होती है क्योंकि जो बल्क हायरिंग है ना वो ज्यादातर लेवल वन एंप्लॉयज के लिए करी जाती है तो ऐसे में कोई भी कंपनी बहुत ज्यादा पैसे नहीं खर्च करना चाहती अब देखो ये जो दोनों प्रॉब्लम्स थी इनको सॉल्व करने के लिए.

अपना ने एक स्केलेबल सॉल्यूशन निकाला जिसका नाम था क्लाइंट फोकस फीचर इंटीग्रेशन अब ये काम कैसे करता है इसको समझने के लिए जरा दो अलग-अलग क्लाइंट्स के केसेस को समझते हैं जो पहला केस से वो एक बैंक रिक्रूटिंग का अब ये जो बैंक था इसको 20 एंप्लॉयज को इमीडिएट हायर करना था और यह कर पाना किसी भी सिंगल रिक्रूटर के लिए पॉसिबल नहीं था तो ये बैंक पहुंचता है.

अपना के पास और अपना बैंक की इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए ये तीन स्टेप्स लेती है जिसमें पहला स्टेप था कि 20 पोटेंशियल कैंडिडेट्स निकालने के लिए सबसे पहले कंपनी ने टेक्नोलॉजी की मदद से अपने बहुत बड़े डेटाबेस के अंदर बैंक की हायरिंग नीड्स के अकॉर्डिंग डाटा सर्च को नैरो डाउन करते-करते बैंक को टोटल 2000 रिलेवेंट कैंडिडेट्स निकाल कर दिए ताकि.

सही टैलेंट को ढूंढने में आसानी हो अब कुछ लोग बोलेंगे कि 2000 लोग भी बहुत लोग होते हैं यह भी कोई छोटा नंबर नहीं है हां बिल्कुल सही बात है इसलिए इन 2000 लोगों को शॉर्टलिस्ट करने के बाद अब आता है ये दूसरा स्टेप स्टेप टू बल्क whatsapp’s में नाना ये बहुत काम की चीज है क्योंकि यहां पर जो 2000 प्रोफाइल्स अपना ने बैंक को सेलेक्ट करके दी थी अब.

बैंक उन सारे लोगों को इंस्टेंट मैसेज भेज सकता है और यही हुआ अपना के बल्क whatsapp2 कैंडिडेट को इंस्टेंट मैसेज भेजा और इनमें से कई सारे कैंडिडेट्स का इंस्टेंट रिप्लाई भी आ गया इंपैक्ट एकदम इमीडिएट था करीब 150 लोगों ने इमीडिएट उस मैसेज को रिप्लाई बैक किया जिसकी वजह से अब बिना वेट करे कंपनी अपने हायरिंग प्रोसेस के नेक्स्ट स्टेप के लिए जा सकती.

है जहां पे आता है ये स्टेप थ्री कन्वर्जन सीवी रिव्यू से लेकर इंटरव्यूज तक जिस प्रोसेस में कंपनीज को कई हफ्ते कई महीनों लग जाते हैं वो सारा काम खत्म किया सिर्फ एक हफ्ते के अंदर और 20 में से आठ कैंडिडेट्स बैंक ने इमीडिएट हायर कर लिए फिर कंपनी ने जो दूसरा केस सॉल्व किया वो था एक फूड टेक जाइंट का मास रिक्रूटिंग अब देखो यहां पर जो कंपनी का क्लाइंट था वो.

थी एक फूटेक कंपनी जिसको मंथली 25 से ज्यादा शेयरों के अंदर 50000 से 1 लाख तक एंप्लॉयज हायर करने थे अब इतने सारे लोगों को हायर करना बहुत ही ज्यादा मुश्किल भी होता है और बहुत महंगा भी पड़ता है तो यहां पर एफर्ट और कॉस्ट दोनों इश्यूज थे अब इस केस के अंदर कंपनी की मदद करने के लिए अपना ने एक स्विफ्ट रिस्पांस टाइम अप्रोच का इस्तेमाल किया जिसमें उनका गोल.

ये था कि इस फूटेक कंपनी के लिए जो लीड्स हैं उनको प्रायो इज किया जाए और जो इन लीड्स पर रिस्पांस टाइम है वो 60 मिनट से भी कम होना चाहिए इससे हुआ ये कि फूटेक कंपनी को जिन कैंडिडेट से बात करने में इतना टाइम लग जाता था अब वो उनको जल्दी रीच आउट कर पा रहे थे जिससे कि कैंडिडेट्स को शॉर्टलिस्ट करने का जो टाइम है वो कम हो गया और हायरिंग प्रोसेस में स्पीड आ गई.

और पता है इससे क्लाइंट के पैसे भी बहुत बचे अपना ने स्ट्रेटजी का इस्तेमाल करके जो क्लाइंट है उसकी प्री ऑनबोर्डिंग कॉस्ट को 10 पर कम कर दिया अब ये सारी चीजें जानने के बाद आपके मन में एक सवाल आ रहा होगा कि चलो प्रॉब्लम सॉल्विंग तो ठीक है मगर ये कंपनी पैसे कैसे कमाती है क्या ये भी बाकी रिक्रूटिंग कंपनीज की तरह ही ऑपरेट करते हैं या फिर इसमें कुछ अलग है.

तो आइए जरा इसको भी समझते हैं जब कंपनी नई-नई स्टार्ट हुई थी तो इनका फोकस सिर्फ ब्लू कॉलर जॉब्स के ऊपर था लेकिन आज अगर आप देखोगे तो ये लोग एंप्लॉयर को हर तरीके के कैंडिडेट्स प्रोवाइड करते हैं अब यहां पर अगर पैसे कमाने की बात करी जाए तो कंपनी पैसे कमाती है फी चार्जिंग से जिसको आसान भाषा में हम लोग एंप्लॉयर फी भी कहते हैं एंप्लॉयर फी अपना के ऐप के ऊपर आपको.

दो तरह के लोग मिलेंगे पहले वो जिनको जॉब चाहिए होती है यानी कि जॉब सीकर्स और दूसरे वो जो कि जॉब दे रहे हैं यानी कि एंप्लॉयर अब अपना क्या करती है कि ये लोग जो जॉब सीकर्स हैं उनसे तो प्लेटफॉर्म के ऊपर आने के लिए को कोई पैसे नहीं लेते मगर जो एंप्लॉयज हैं उनसे कंपनी एक फी चार्ज करती है और यह जो फीस है ये कंपनी का मेजर रेवेन्यू सोर्स है इसके अलावा यह भी हो.

सकता है कि आने वाले टाइम में कंपनी रेवेन्यू की एक और स्टीम बना ले जो कि हो सकती है स्किल एजुकेशन फी क्योंकि इन्होंने कई सारे गवर्नमेंट इंस्टीट्यूशंस के साथ कोलैबोरेट किया है जिसमें कई बड़े नाम जैसे कि मिनिस्ट्री ऑफ माइनॉरिटी अफेयर्स नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यूनिसेफ यूवा इन सब की मदद से कंपनी जो भी लोग उनके प्लेटफार्म के ऊपर जॉब ढूंढ रहे.

हैं उन सबको स्किल्स इंप्रूव करने में हेल्प करेगी ताकि एंप्लॉई होने में उनको आसानी हो और ये जो स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स है हो सकता है कि कंपनी आगे चलकर इनके लिए कुछ चार्ज करे मगर यहां पर भी कंपनी का जो पैसे कमाने का तरीका है ना उसके अंदर भी एक कैच है और उस कैच का नाम है पे एज यू गो मॉडल याद है एक वक्त ऐसा हुआ करता था जब हम सभी लोग अपने मोबाइल का.

डेटा बहुत ही सोच समझकर खर्च करते थे क्योंकि airtelgprs.com सिर्फ 1gb डाटा दे रहे थे वहीं पर jio3 के अंदर अनलिमिटेड डाटा दिया बिल्कुल इसी तरह ये जो ऑनलाइन जॉब्स की मार्केट थी ना इसमें भी सारे प्लेयर्स जैसे कि nukri.com मनस्टर इड ये सब के सब जो एंप्लॉयर हैं उनसे पूरे एक साल का एनुअल.

लॉक इन फी चार्ज करते थे मतलब कि पूरे साल के पैसे ले लेते थे लेकिन वहीं पर अपना ने एक बहुत ही स्मार्ट तरीका निकाला जिसको कहते हैं पे एज यू गो मॉडल इन्होंने जो एंप्लॉयर था उससे पूरे साल के पैसे लेने की बजाय उनसे सिर्फ उतने ही पैसे चार्ज करें जितने टाइम तक वो इनके एप्लीकेशन को इस्तेमाल कर रहा था इससे हुआ क्या कि जो एंप्लॉयर है उसको एक ऑप्शन मिला कि वो.

अपना के प्लैटफॉर्म को यूज करके देख सकता है कि क्या ये प्लेटफॉर्म उसके काम आ भी रहा है या नहीं उसको जो लोग चाहिए वो लोग उसको यहां पे मिल भी पा रहे हैं या नहीं और उसी हिसाब से वो कंपनी को पैसे दे रहा है और जब उसके ये ज्यादा काम आने लग जाए तब वो कंपनी के साथ एक लॉन्ग टर्म डील साइन कर सकता है इसीलिए अपना का जो प्लेटफार्म है आज वहां पर 2 लाख से भी.

ज्यादा स्मॉल बिजनेस यूनिट्स मौजूद हैं और सिर्फ इतना ही नहीं यहां पर टॉप कंपनीज जैसे कि [संगीत] जॉब की बात चलाने के लिए कांटेक्ट बनाना बड़ा आसान है नमस्ते सुधाकर जी थर्ड फ्लोर वाले सुधाकर जी की कंपनी में कोई पोस्ट खाली हो सकती है सर वो आपने इंटरव्यू के बारे में.

कहा था वैसे मैनेजर की चाय रोज सीधे नंदू भैया के य से ही जाती है या फिर अपने जौनपुर वाले फूपा जी के दूर के रिश्तेदार यही तो रहते हैं एहसान मांगने के ऑप्शन तो बहुत पर नौकरी सिर्फ एहसान से मिले जरूरी है क्या अपना ऐप पे लाखों जॉब ऑप्शंस है बात सीधे एचआर से होती है और झट से इंटरव्यू शेड्यूल हो.

जाता है तो मैंने जॉब चुनी अपने दम पे अपना काम आएगा अब अगर आपने ध्यान से नोटिस किया हो तो अपना का ये जो ऐड कैंपेन है ये टारगेट कर रहा है एक जॉब ढूंढने वाले के सेल्फ रिस्पेक्ट के इमोशन को एडवर्टाइजमेंट की ऐसी लाइंस लोगों के दिमाग पर एक बहुत ही स्ट्रांग इंपैक्ट छोड़ती है जिससे कि लोगों को लंबे वक्त तक वो एडवर्टाइजमेंट याद रहता है और अपना के.

साथ यही हुआ कंपनी के ऐसे ऐड कैंपस सुपरहिट साबित हो होते हैं क्योंकि इन एड्स ने एक आम आदमी के दिल पर ऐसा इंपैक्ट छोड़ दिया जो उसे लंबे वक्त तक याद रहेगा इसे एक एडवर्टाइजमेंट की मदद से अपना ने ना सिर्फ लाखों लोगों के सेल्फ रिस्पेक्ट के इमोशन को टैप किया बल्कि एंड में जो लाइन है अपना ऐप पर लाखों जॉब ऑफर्स बात सीधे एचआर से होती है इस एक लाइन ने लोगों.

को उम्मीद दी ये कॉन्फिडेंस दिया कि उनकी भी जॉब लग सकती है अब जहां पर कंपनी एक तरफ इन्फ्लुएंस मार्केटिंग कैंपेन लॉन्च कर रही थी वहीं पर कंपनी ने दूसरी तरफ जो एंप्लॉयर हैं जो कि इनके प्लेटफॉर्म पर हायरिंग करने के लिए आते हैं उनके लिए एआई एल्गोरिथम का इस्तेमाल कर करके चीजें और आसान बनानी शुरू करी जिसका एंड रिजल्ट ये होता है कि कंपनी को एक बहुत ही पावरफुल.

रिटेनर मिल जाता है जिसकी मदद से अब जो भी बंदा अपना के प्लेटफॉर्म को जॉइन करता है वो लंबे वक्त तक प्लेटफॉर्म के साथ बना रहता है अब ऐसा होता क्यों है जरा इसको समझते हैं आज की डेट में बड़ी से बड़ी कंपनी अपने कस्टमर्स को रिटेन करने के लिए एक प्रिंसिपल का इस्तेमाल करती है जिसको कहते हैं नेटवर्क इफेक्ट मतलब कि कंपनी का जो प्रोडक्ट है वो एक यूजर के लिए और भी.

ज्यादा वैल्युएबल बन जाता है जब उसको बाकी लोग इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं लेकिन ये जो नेटवर्क इफेक्ट होता है ये भी दो टाइप के होते हैं पहला टाइप होता है टू साइडेड नेटवर्क इफेक्ट इसमें क्या होता है कि एक पर्टिकुलर प्रोडक्ट का जो नेटवर्क इफेक्ट है वो उस प्लेटफार्म पर दो अलग-अलग टाइप के यूजर्स के ऊपर डिपेंड करता है जैसे फॉर एग्जांपल amazononline.in.

लोग यानी कि सेलर्स बढ़ेंगे अपना और nukri.com इन दोनों ने ही ऐसे ही टू साइडेड नेटवर्क इफेक्ट्स बिल्ड करें प्लेटफॉर्म के ऊपर जैसे ही जॉब ढूंढने वाले लोग बढ़े वहां पर एंपलॉयर्स यानी कि जॉब देने वाले लोग भी ज्यादा आने लग गए लेकिन यहीं पर जो दूसरे टाइप का नेटवर्क इफेक्ट होता है वो होता है वन साइडेड नेटवर्क इफेक्ट ऐसे प्रोडक्ट्स जहां पर.

जैसे-जैसे ज्यादा यूजर्स आने लगते हैं वो प्रोडक्ट बाकी यूजर्स के लिए और भी ज्यादा अच्छा होने लगता है फॉर एग्जांपल जैसे कि facebooksignup.in ऐसे ही सेम यूजर्स और ज्यादा आने लगते हैं इसीलिए ऐसे टाइप के जो प्रोडक्ट्स होते हैं उनके ऊपर यूजर्स का रिटेंशन बहुत ही ज्यादा होता है जैसे फॉर एग्जांपल है ना ये एक नेटवर्क इफेक्ट वाली कंपनी को.

बहुत फायदा देते हैं बहुत हैरानी होगी कि रिक्रूटिंग की दुनिया में nukri.com से लेकर इड तक ये सारी कंपनीज सिर्फ टू साइडेड नेटवर्क इफेक्ट के ऊपर ही काम करती थी लेकिन अपना इकलौती ऐसी हायरिंग कंपनी बनती है जो कि टू साइडेड के साथ-साथ वन साइडेड नेटवर्क इफेक्ट को भी बिल्ड कर पाई देखो होता क्या था कि जो एंप्लॉयज हैं वो 5 10 15 20 50 करीब इतने एंप्लॉयज हायर.

करने के लिए इनके प्लेटफॉर्म पे आते थे अब जाहिर सी बात है कि इतने लोगों की हायरिंग करने में उस कंपनी को टाइम भी लगेगा तो तब तक तो वो इनके प्लेटफार्म को यूज ही करेगी मगर बात यह है कि जो बंदा जॉब ढूंढ रहा है एक बार ही उसको जॉब मिल गई तो उसके बाद आखिर वो इस प्लेटफार्म को दोबारा क्यों यूज करेगा नहीं करेगा राइट भाई जॉब लग गई है अब ऐप को डिलीट कर दो मगर अपना ने किया.

ये कि उन्होंने इन सारे लोगों को जो कि जॉब ढूंढ रहे हैं उनको इनेबल किया कि वो यहां पर अपनी एक प्रोफेशनल नेटवर्किंग डेवलप कर पाए ताकि वो लंबे टाइम तक इस प्लेटफार्म पे बने रहे और अपने ही जैसे बाकी लोगों के साथ एक बहुत ही स्ट्रांग प्रोफेशनल एक अच्छा रिलेशनशिप शिप बिल्ड कर पाए जिससे इन सारे लोगों ने ना सिर्फ जॉब ढूंढने के टाइम पर इस प्लेटफॉर्म को.

यूज़ किया बल्कि जॉब मिलने के बाद भी वो लोग इस प्लेटफार्म पर बने रहे क्योंकि उन्होंने जो प्रोफेशनल नेटवर्क डेवलप किया था वो अभी भी उस प्लेटफॉर्म के ऊपर है जैसे कि मान लो रमेश जो कि मार्केटिंग मैनेजर की एक जॉब ढूंढ रहा है अब जब वो अपना के प्लेटफॉर्म के ऊपर आएगा तो उसको ना सिर्फ एंप्लॉयर बल्कि उसी के जैसे बाकी कैंडिडेट्स जो कि सेम तरीके की जॉब ढूंढ.

रहे हैं उनके साथ कनेक्ट करने का नए आइडियाज नए थॉट्स एक्सचेंज करने का ऑप्शन मिलता है इससे क्या हुआ कि प्लेटफॉर्म के ऊपर ज्यादा जॉब सीका जाने लगे और जॉब लगने के बाद भी क्योंकि उन्होंने यहां पर एक कम्युनिटी डेवलप की है वो उस कम्युनिटी की वजह से प्लेटफॉर्म पर बने रहे इनफैक्ट लोगों ने यहां पर अपने ही सर्कल के बाकी लोगों को भी इनवाइट करना शुरू कर दिया.

जैसे मान लो अगर मैं एक प्रोडक्ट मैनेजर की जॉब ढूंढ रहा हूं तो मेरे को जॉब और प्रोफेशनल नेटवर्क ये दोनों इस प्लेटफॉर्म पर मिल गए तो मैंने क्या किया अपने एक दोस्त को भी बोला कि तू भी इस प्लेटफॉर्म पे आ जा क्योंकि मैं तो यहां पे हुई और मेरे को ये दोनों चीजें यहीं पर मिली है तो तुझे भी मिल जाएगी इसलिए आज अगर आप देखोगे तो इस कंपनी के पास सिर्फ 4 साल के.

अंदर-अंदर 5 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स हो गए हैं इसी तरीके से अपना ने दोनों टाइप्स के नेटवर्क इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया ताकि ना सिर्फ यूजर्स उनके प्लेटफॉर्म पर आए बल्कि लंबे टाइम तक उनके प्लेटफॉर्म पर टिके भी रहे लेकिन पता है इनमें से कुछ भी पॉसिबल नहीं हो पाता अगर कंपनी ने ये नहीं किया होता तो और वो चीज है गेटिंग द टाइमिंग राइट कई सारी कंपनीज आज इतनी.

सक्सेसफुल इसलिए क्योंकि उनकी टाइमिंग सही थी जैसे इसी का एक क्लासिक एग्जांपल है एयर बीएनबी ये कंपनी शुरू हुई थी जब 2008 का रियल एस्टेट क्रैश आया था उस वक्त मार्केट की कंडीशन ऐसी थी कि लोग लोगों ने रियल स्टेट के बढ़ते हुए दाम को देखकर उसके अंदर बहुत ज्यादा पैसा इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया और कई लोगों ने तो लोन पर कई सारे घर खरीद लिए लेकिन जब ये क्रैश आता.

है तो सब खत्म हो गया क्योंकि एक तरफ तो लोगों की जॉब जा रही थी वहीं पर दूसरी तरफ लोगों ने जो लोन लेकर घर खरीदा था अब उसकी जो वैल्यू है वो उस वैल्यू से भी कम हो चुकी थी जिस वैल्यू पर उन्होंने वो घर खरीदा था तो ऐसी कंडीशन में जब एक कंपनी आकर इन लोगों से ये कहती है कि आप अपने घर का कोई भी कमरा जो खाली पड़ा है उसको रेंट पर चढ़ा सकते हो तो सारे लोग के लिए ये.

कंपनी किसी फरिश्ते से कम नहीं होती यही कारण था टाइमिंग जिसकी मदद से एयर बीएनबी ने बहुत ही स्पीड से कस्टमर्स एक्वायर करे और बहुत ही कम वक्त में इस दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनीज में से एक बन गई और बिल्कुल सेम इसी तरीके से अपना ने भी किया इन्होंने कोविड आने से पहले स्टार्ट किया था और कोविड में इन्होंने अपने ऑपरेशंस को डबल डाउन कर दिया क्योंकि मार्केट की.

कंडीशन को ध्यान से देखो jio1 आदमी के हाथ में स्मार्टफोन है पर कोविड है तो कोई भी बाहर नहीं निकल पा रहा और कोविड की वजह से अब बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो अपनी जॉब खो चुके हैं और अब जॉब की तलाश में हैं अब ऐसे में अगर कोई कंपनी आकर आपको यह बोले कि घर बैठे-बैठे वो आपको कंपनी के एचआर से कनेक्ट करा के आपको जॉब दिलवाने में मदद करेगी तो आप क्या करोगे उस प्लेटफार्म को.

इस्तेमाल करोगे राइट और लोगों ने भी यही किया और यह एक बहुत बड़ा कारण बनता है कि कंपनी अपने कंपीटीटर से इतनी आगे निकल गई इनफैक्ट आज भी अगर आप देखोगे तो हर 10 में से सात फ्रेशर्स आपको अपना के प्लेटफॉर्म पर मिल जाएंगे और ये सब कुछ हो कैसे पाया मार्केट की एक गैप को निकालकर उस उसको इनोवेटिव तरीके से सॉल्व करके पर अब सबसे इंपॉर्टेंट कि वो कौन से पावरफुल बिजनेस.

लेसंस हैं जो हम इस केस स्टडी से सीखकर अपने बिजनेस के अंदर इंप्लीमेंट कर सकते हैं सबसे पहला लेसन है नेवर कैरी अ मायोपिक व्यू बहुत बार ऐसा होता है कि हम लोग चीजों को एक पर्टिकुलर इंडस्ट्री को सिर्फ अपने ही व्यू पॉइंट से देखते हैं बिना इस चीज को समझे कि यहां पर बहुत सारी ऐसी भी चीजें हो सकती हैं जो हमें इस वक्त दिखाई नहीं दे रही पर वो एजिस्ट जरूर करती.

है जैसे कि इस केस के अंदर अपना के सारे कंपीटीटर्स सिर्फ एक ही नजर से इंडस्ट्री जी को देखकर आगे बढ़ रहे थे पर वहीं पर अपना ने एक अलग नजरिए से इस पूरी इंडस्ट्री को देखना शुरू किया जहां पे उन्हें उन उन गैप्स का पता लगा जो बाकी कंपीटीटर्स देख ही नहीं पा रहे थे इसी तरीके से आप अपने बिजनेस में देखने की कोशिश करो कि वो कौन सी ऐसी प्रॉब्लम्स.

हैं जिनके ऊपर ज्यादातर लोगों की नजर ही नहीं है फिर इसके बाद आता है ये दूसरा लेसन जो कि है यूजर इनसाइट इज द की टू इनोवेशन हम सब लोग अपने बिजनेस के अंदर किसी ना किसी तरीके की इनोवेशन करने की तलाश में रहते हैं मगर जो बड़ी कंपनीज हैं उन सब में एक चीज कॉमन है कि वो वो अपने सारे के सारे इनोवेशंस जो यूजर से कलेक्ट किया गया फीडबैक है उसको स्टडी करने के.

बाद ही करती हैं जैसे कि अगर इस केस की बात करी जाए तो निर्मित ने खुद अलग-अलग जॉब्स करके देखी कि आखिर इंडस्ट्री के अंदर जो एक्चुअल यूजर है उसकी प्रॉब्लम क्या है इनफैक्ट आज तक भी अपना का जो प्रोडक्ट है वो उसको यूजर के फीडबैक के बेसिस पर ही इनोवेट करते हैं और यही कारण है कि इतने कम वक्त में इस कंपनी ने वो कर दिखाया जो बाकी लोग नहीं कर पाए पर पता है.

ऐसी ही कुछ कहानी है जारा की एक ऐसा ब्रांड जिसने मार्केट की एक बहुत ही छोटी गैप को आइडेंटिफिकेशन

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